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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

शरद के स्वागत में

डॉ.मनोहर अभय

पकड़ कलाई मेघ की, वरखा लौटी देश शरद सुखाने में लगी, दूधों धोए केश शीश फूल सा चन्द्रमा सजा यामिनी भाल | गूँथ रही है चाँदनी लिए हाथ मणिमाल शरद वधूटी सज रही किये रजत श्रृंगार हीर कनी नथुनी जड़ी गले चन्द्रिका हार खंजन अंजन लगा रहे, देख शरद की रैन चातक सोया नींद भर, है चकोर बेचैन चाँदी बाँटे चाँदनी दूर क्षितिज के तीर शशिमुख धोती यामिनी अँजुरी भर- भर क्षीर मंथर गति पुरवाइयाँ, गगन हुआ शालीन शरद बिछाने में लगी, धुले धवल कालीन रतनारी संध्या सजी शारदीय आकाश चलो आज बैठें कहीँ अमलतास के पास

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