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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

तबाही

अनिल कुमार

पहले ही विश्व के दो महायुद्ध ने क्या कम तबाही लायी थी ? कितने मर गये ? कितनों को दहलीज नसीब नहीं हो पायी थी ? दो परमाणु बम क्या कम थे? जो हीरोसीमा-नागसाकी में क्या मची तबाही थी ? अब भी उन पदचिह्न पर दुनिया आगे बढ़ती है तनके-सी बहसों पर परमाणु हमले की धमकी अक्सर सीमाओं पर होती है दो महायुद्धों की मार हीरोसीमा-नागासाकी से बंजर धरती की पुकार चीख-चीख कर चिल्लाती है अब की बार जो छिड़ गई परमाणु युद्धों की तकरार तो सारी मानवता राख़ का ढेर बन जायेगी हम मंगल पर परमाणु हमले की बात करते हैं उसकी बंजर धरती में जीवन की तलाश करते हैं पर धरती का अंजाम भी तब बिल्कुल मंगल जैसा होगा हम ढूँढ़ रहे मंगल पर जीवन लेकिन अपना तो खोजने वाला भी नहीं होगा।


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