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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

मेरा फौजी

राकेश कुमार तगाला

जब से रमेश के शहीद होने की खबर मिली थी,सारा गाँव विलाप कर रहा था।सगे-संबंधियों का रो-रोकर बुरा हाल था।

सभी उसे याद कर रहे थे।वह पूरे गाँव में चर्चा का विषय बन गया था।उसकी बात करते हुए हर आँख नम हो रही थी।मन कहता था।ये खबर झूठी हो जाए।पर सच्चाई से कब तक मुँह मोड़ा जा सकता था?रात बहुत लम्बी लग रही थी।

सुबह 9:00 बजे तक उसका शव आने वाला था, तिरंगे में लिपटा हुआ।यही तो प्रथा थी,इसी तरह हर शहीद तिरंगे लिपटा हुआ,अपने घर आता था।देश पर शहीद होना,गर्व की बात थीं,सब यही कह रहें थे।

रमेश की माँ अपने एकलौते बेटे को याद करके फुट-फुट कर रो रही थीं।वह खुद को बड़ी मुश्किल से सम्भाल रही थी।वह कभी नहीं चाहती थी कि उसका बेटा फौज में भर्ती हो।

पर वह मानता ही नहीं था,उस पर तो देश-भक्ति का भूत सवार था।कई बार उसे समझाती थी,तेरे बाद मेरा क्या होगा?मैं तेरे बिना कैसे रहूँगी?मान जा मेरे लाल।उस पर कोई असर नहीं होता था।

वह सुबह से ही व्यायाम में जुट जाता।जब भी फौज की भर्ती खुलती,वह उत्साह से भर जाता था।वह कभी निराश नहीं होता था।माँ,तुम देखना मैं अगली बार जरूर चुन लिया जाऊँगा।माँ,तुम मेरे लिए भगवान से प्रार्थना करो ना।पर मैं मन से,कभी नहीं चाहतीं थीं कि वो फौज में जाए।

पत्नी,मीना, आँसू बहा रही थी।वह किसी से बात नहीं कर थीं।उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसका फौजी हमेशा के लिए उसे छोड़ कर चला गया था।

उसे आज भी वह याद हैं,जब वह पहली बार रमेश से मिली थी।दुबली-पतली काया,बात-बात पर शरमा जाना।वह मुझें ही देखता रहता था।पर हिम्मत नहीं जुटा पाता था।जब भी मैं मंच पर किसी नाटक में भाग लेती। वह मुझें टकटकी लगाए देखता रहता था।

मैं एक देश-भक्ति पर लिखें नाटक में,शहीद विधवा की भूमिका निभा रही थीं।जिसने अपनी माटी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।मेरा अभिनय सभी ने पसंद किया था।सभी मेरी प्रसंशा कर रहे थे।और मेरे अभिनव पर जोरदार तालियाँ बजा रहे थे।तालियों की गूंज इतनी अधिक थी कि मैं अपने अभिनय पर गर्व महसूस कर रही थी।

रंगमंच पर नाटक समाप्त होते ही,बधाई देने वालों की लाइन लग गई थी।सभी मेरे अभिनय की तारीफ कर रहे थे।बधाई हो,एक दुबला-पतला युवक मेरे सामने आया।उसने हिम्मत दिखाते हुए मुझसे हाथ मिलाकर बधाई दी।आपका अभिनय कमाल का है। मैंने अपना हाथ लगभग छुड़ाते हुए कहा, धन्यवाद श्रीमान।जो आपको मेरा अभिनय इतना पसन्द आया।उसने बड़े सहज ढंग से कहा मीना जी,आप भी मुझें बहुत पसंद आई हो।बस अब दिल चाहता है कि आपको ही देखता रहूँ।मुझें इस तरह के बर्ताव का कोई अंदाजा नहीं था। खैर बात आई गई हो गई।

दोबारा मिलने का कोई मौका नहीं था।मुझें सैर करने का बहुत शौक था। हमेशा सुबह सैर के लिए निकल पड़ती थी। उस दिन सामने से रमेश आता दिखाई पड़ा। उसने झुककर मुझें हेलो कहा और आगे निकल गया।पार्क में मुझें काफी लोग जानते थे। मैं मन ही मन डर की रही थी कि कहीं किसी ने मुझें देख ना लिया हो।मैंने इधर-उधर नजरें दौड़ाई,पर सभी मस्त थे।कोई तेज कदमों से चहल-कदमी कर रहा था तो कोई योगा में मस्त था।रमेश अब मुझें रोज ही हेलो करता था। कभी-कभी मेरा पीछा भी करता। कभी घर तक चला आता था। क्या बात है,आप हमेशा मेरा पीछा करते हो,कुछ कहना चाहते हो,कोई इच्छा है?पहले तो वह मेरे सवालों से गंभीर हो गया। फिर हँस कर बोला, इच्छा तो तुम्हें अपना बनाने की है।

तुम अपना इरादा बताओ,मीना जी।तो आप मेरे आशिक हो या आशिक बनाने का प्रयास कर रहे हो।उस पर मेरी बातों का कोई असर नहीं हुआ।वह हँस कर बोला,आप जैसी ब्यूटी का आशिक होना तो सम्मान की बात हैं। एक मौका देकर देख लो,मीना जी। मैं हँसे बिना ना रह सकी।अच्छा तो मेरा चांस पक्का है,मीना जी।मैंने कहा,अच्छा कल मिलते हैं।

मीना: रमेश-अब कहो, क्या तुम गंभीर हो या सिर्फ टाइमपास का इरादा हैं।जो कहना हैं,सच कहना।

रमेश:मीना- भगवान की कसम खाकर कहता हूँ।मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।मैं तुमसे साथ शादी करना चाहता हूँ।मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ। पर मेरा परिवार चाहता है मेरी शादी एक फौजी से हो और तुम्हें देखकर लगता हैं और वह चुप हो गई।

रमेश बस इतनी सी इच्छा,कुछ बड़ा माँगा होता। मैं तुम्हारा फौजी बनने के लिए तैयार हूँ। वह खूब मेहनत करता,फौज में भर्ती होना ही उसका पहला लक्ष्य बन गया।आखिर उसकी मेहनत सफल हुई।वह फौज में भर्ती हो गया।अब तो खुश हो,तुम चाहती थी कि मैं फौज में भर्ती हो जाऊँ।मैं बहुत खुश हूँ,मैं शादी के लिए तैयार हूँ,मेरे फौजी।

तुम सिर्फ मेरे फौजी हो।एक सप्ताह में शादी हो गई। सब कुछ इतना जल्दी हुआ,पता ही नहीं चला।मुझें मेरा फौजी मिल गया था।वह एक महीना रह कर वापस ड्यूटी पर चला गया।भारत-पाक सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा था। भारतीय सेना पाक सेना के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही थी। देश पर मिटाने के लिए हमारी फौज लगातार आगे बढ़ रही थी।और फिर कुछ गोलियाँ रमेश के शरीर को छलनी कर गई,भारत माता की जय के साथ ही उसकी धड़कन हमेशा के लिए रुक गई।

रमेश का शव गाँव में आ गया था। सारा गाँव अपने वीर शहीद के दर्शनों के लिए टूट पड़ा। सभी की आँखे नम थी। मीना शव के साथ चिपक के रो रही थी। मेरा फौजी लौट आया हैं।उसे देख कर, सभी का कलेजा फटा जा रहा था। वह बार-बार कह रही थी,मेरा फौजी।सारा गाँव एक साथ चिल्ला रहा था। फौजी तेरा या मेरा नहीं होता,बेटी।वह पूरे देश का होता हैं।बेटी उसकी मौत पर आँसू ना बहाओ।वह अपनी धरती, माँ के लिए शहीद हुआ।

राज्य सरकार ने रमेश को उसके अदम्य साहस के लिए समानित किया।मीना सफेद साड़ी में सम्मान-पत्र ले रही थी।पर उसकी नज़रे अब भी अपने फौजी को ढूढ़ रही थीं।


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