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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

हाइकु

अशोक बाबू माहौर

1. रौशन घर जगमग चेहरे खुशी अनेक । 2. ताबीज गले भूत बयार भागे लोग मगन । 3. बाजारी द्रश्य भीड़ लबालब है संभाले कौन ।

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