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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

किसी को क्या बताएं

संदीप राज़ 'आनंद'

किसी को क्या बताएं अब भला हम ये गम कितना दिखाएं अब भला हम। तुम्हे हम इश्क़ की भी आरसी दें! कहो तो मर ही जाएं अब भला हम। तुम्हारे चैट फोटो और नम्बर अरे! क्या क्या छुपाएं अब भला हम। सभी ने आजमाया है हमें बस किसे अपना बनाएं अब भला हम। यहां तो लोग अनजाने सभी हैं किसे दिल से लगाएं अब भला हम। मज़ा तन्हाई का अपना अलग है उसे क्यूं ही बुलाएं अब भला हम।

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