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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

भोजपुरी गजलें

विद्या शंकर विद्यार्थी

1. केहू गा रहल बा केहू खा रहल बा केहू बा कि बाजारी में जा रहल बा कहँवा भीड़ में रोटी के आस बाटे केहू के कहाँ केहू साटा रहल बा अदिमी के लहू से ठोकाइल जहाँ गढ़ केहू खास ना बाटे हट जा रहल बा हरियरी खेत के कइसे बाँची इहाँ के बा जे पर भरोसा सेही खा रहल बा आपन अब रहल ना केहू कुछ कहल ना जूठा मांज धो के लइका खा रहल बा। 2. बोले के दवर का अब एहिजा रहल बा नीमन तऽ इहे बा अब एहिजा सहल बा चहके के अबर के सोराइल कहाँ दिन पानी पऽ लहर मर के एहिजा रहल बा पनपे के जगह से ना सोचल गइल बा केहू के खबर अदिमी एहिजा रहल बा नफरत के नशा बा छवले, के धनी बा अदिमी के जहर अदिमी एहिजा रहल बा ।

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