मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

आवारा कुत्तों का रोड शो .....

सुशील यादव

मार्निग-वाक में डागी ‘सीसेंन’ को घुमाने का काम फिलहाल मेरे जिम्मे आ गया है |

रास्ते में दीगर कुत्तों से बचा के निकाल ले जाने का टिप, गणपत ने जरूर दिया था, मगर प्रेक्टिकल में तजुर्बा अलग होता है|

एक हाथ में डंडा,एक हाथ में पटटा पकडे, कुत्ते के बताए रास्ते में खुद खिचते चले जाओ|सामने आये दूसरी नस्ल की बिरादरी वालो को भगाते रहो |

उस दिन शर्मा जी साथ हो लिए ,पूछे कौन सा है ?मैंने कहा अल्शेशियन |

कितने का लिए ? मैंने कहा ,एक मित्र के यहाँ बोल रखा था ,उनने दिलवाया |वे बोले; और कोई मिले तो दिलवाइए हमें भी |

मैंने कहा ,शर्मा जी ,झंझट का काम है कुत्ते का शौक करना| अपना बस चले तो अभी ये पट्टा आपको थमा के छुट्टी पा लें ,मगर पिंटू का शौक है; सो खींचे जा रहे हैं |

वैसे भी आप मांस-मच्छी,अंडा कहाँ खिला पाओगे ,ये नस्ल तो इनके बिना गाय माफिक हो जायेगी |

शर्मा जी नान वेज पर टिक नहीं पाए; वे राजनीति में उतर आये |क्या कहते हैं ?किसकी बनेगी ?

मैंने कहा जो ज्यादा भौक ले वही मैदान से दूसरों को खदेड़ने के काबिल होता है ,आपका क्या कहना है ?

आपकी बात तो सही है |आजकल टी वी देख-देख ,सुन सुन के तो कान पाक गए हैं |ये तो अच्छा है कि आई पी एल वाले सम्हाल ले रहे हैं ,आप इंटरेस्ट रखते हैं न, क्रिकेट में ?

मैंने कहा हाँ ,क्यों नहीं, सीसेंन उधर नही ....रास्ते में चलो ....|

शर्मा जी ने कहा आपकी बात समझ लेता है ,देखो रास्त में आ गया |

मैंने कहा शर्मा जी यही तो खूबी है इन कुत्ते लोगो की|

भौंकते जबरदस्त हैं ,दौड़ाएंगे भी खूब, मगर जब तक मालिक न कहे काटेंगे नहीं |

आगे देखिये...... ,वे जो कुछ आवारा कुत्ते आ रहे हैं कैसे गुर्रायेगे इस पर....... लगेगा अकेला आये तो नोच लेगे........|

मगर वहीँ ,जब हमारा अल्शेशियाँ एक गुर्रायेगा तो दुम दबा के भाग खड़े हो जायेंगे स्साले ..... |

शर्मा जी को तत्कालिक परिणाम भी देखने को मिल गया |

चक्रव्यूह की माफिक, आवारा रोड छाप कुत्तों से, अल्शेशियन सीसेन घिर गया |,वो थोडा सहमा मगर जैसे ही हमने हिम्मत दी, वो उन सब पर भारी पडने लगा|

आवारा कुत्ते आपनी रोड शो रैली को, दूसरी गली की तरफ ले गए |

मैंने कहा देखा शर्मा जी ,यही हमारे इधर भी हो रहा है |रैलियां देख के हम अंदाजा लगा लेते हैं उमीदवार में दम है |जब तक कोई ताल ठोंक के सामने आके नहीं गुर्रायेगा जनता बेचारी भ्रम पाले रहेगी और अपना वोट देते रहेगी |

हमारा मानना है ,आप क्वालिटी देखो नस्ल देखो ,दमखम देखो |ये नहीं कि चोर,उठाईगीर धोखेबाज ,सुपारी-किलर ,ब्लेक मार्केटियर ,दलाल-ठेकेदार कोई भी टिकट हथिया ले, और उसे आप चुन लो|

शर्मा जी आजकल यही सब कुछ हो रहा है |

एक ने भाषण झाडने में महारत हासिल कर ली,दूसरे ने पोल खोलने की विद्या सीख ली, और बन गए राजनीति के दिग्गज पंडित |गुंडे-मवाली,घूसखोरो से देश को बचाओ भइ ... बहुत हो गया |

इतनी देर खड़े गपियाने में, सीसेन कब दिशा मैदान से फारिग हो गया ,पता ही नहीं चला |


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें