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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

चित्रमय बरसात .....

सुशील यादव दुर्ग

पानी की बौछार है ,अजब फटा तिरपाल अलगू- जुम्मन पूछते ,राहत जुड़ा सवाल # अपने घर लगती नहीं ,इस मौसम में आग चार तरफ पानी सहित , इच्छाधारी नाग # जलमग्न शहर ये हुआ, जहां हुई बरसात खुश हो उधर शकुन्तला,करती मन की बात # पिया अभी परदेश में ,उस पर ये बरसात विरहन की बस त्रासदी , कठिन बहुत हालात # पानी पानी सब तरफ ,पानी से मत खेल शासन नौका डूबती,बीच खड़ी है रेल # देना कब से चाहता, ये मन तुझे सलाह सीने में जब आग हो ,पानी ढूंढ अथाह #

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