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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

जात नहीं पूछा करते

सलिल सरोज

भूख लगे तो रोटी की जात नहीं पूछा करते पेट को लगेगी बुरी,ये बात नहीं पूछा करते 1 ये धरती बिछौना ,ये आसमाँ है शामिआना बेघरों से बारहाँ दिन -रात नहीं पूछा करते 2 मालूम है कि एक भी पूरी नहीं हो पाएगी बेटियों से उनके जज्बात नहीं पूछा करते 3 क्यों बना है बेकसी का ये आलम कौम में सरकार से ऐसे सवालात नहीं पूछा करते 4 जिन उँगलियों में कालिख लगा दी गई हो उनसे फिर कलम-दवात नहीं पूछा करते 5 जो दोस्त चला गया कमाने, गांव छोड़ के कब होगी अब मुलाक़ात नहीं पूछा करते 6 वो टूट जाएगा बताते बताते हाल अपना ऐसे इश्क़ की शुरुआत नहीं पूछा करते 7

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