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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

मातृभूमि और मातृशक्ति का राष्ट्र : हिंदुस्तान

सुनील पोरवाल "शेलु "

हिंदुस्तान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो अपने आप में एक अलग ही महत्व रखता है | आज भी हमारी मातृभूमि हमें वही संस्कार प्रदान करती है, जो हमारे संतों और मुनियों ने पुराणों में दर्ज कर रखे हैं, मातृभूमि कभी भी अपनी संतानों के साथ पक्षपात या दुर्व्यवहार नहीं करती है, क्योंकि एक माँ के लिए उसकी सभी संताने समान रूप से प्रिय होती है |

जो संस्कार हमारी मातृभूमि हमें प्रदान करती है, उसके लिए मातृभूमि ने मातृशक्ति का स्वरूप धारण किया है, ताकि सभी को यह संस्कार तरक्की, उन्नति के लिए भविष्य में एक सफल मार्गदर्शन प्रदान कर सकें |

भारतभूमि को यूँ ही नहीं कोई महापुरूषों की कर्मभूमि कहता है, यह माटी ही ऐसी है जो वीर और संस्कारी सपूतों को जन्म देती है, साथ ही अपनी लाड़ली संतानों का मार्ग भी प्रशस्त करती है | आज अगर मातृभूमि सुरक्षित है तो मातृशक्ति सुरक्षित है, और उसी के फलस्वरूप हमारी यह दोनों ही जननी हमें एक योद्धा की भाँति संस्कार, अनुशासन और संस्कृति की प्रेरणा समय-समय पर प्रदान करती रहती है |

मातृभूमि और मातृशक्ति दोनों ही अपने आप में पृथक-पृथक महत्ता रखते हो परंतु हमारे जीवन में दोनों का ही उपकार कई मायनों में मायने रखता है | यदि मातृभूमि हमें अपनी माटी की सौंधी महक में डूबने का भाव प्रदान करती है तो मातृशक्ति भी हमें अपने आँचल से इस प्रकार ढँक देती है, कि हमें किसी भी मुसीबत और विपत्ती का खयाल तक नहीं रहता है |

यदि माँ का आँचल अपनी संतान के सुख के लिए भगवान ने प्रदान किया है, तो मातृभूमि का माटी रूपी आँचल भी राष्ट्र की समस्त संतानों के लिए सदैव सुखदायक रहता है | इसलिए अपनी मातृभूमि को अपनी कर्मभूमि बनाए, और मातृशक्ति को राष्ट्र शक्ति |

तो स्वयं ही हमारा हिंदुस्तान पुन: भारत माता के आशीर्वाद और स्वदेश प्रेम से लबरेज दिखाई पड़ेगा!!

जय मातृभूमि, जय मातृशक्ति!!


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