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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

*गांधी दर्शन में निहित है प्राणीमात्र के कल्याण की भावना*

राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"

हम प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर को मनाते हैं। गांधी जी ने अहिंसा के बल पर भारत को आज़ादी दिलाई थी। बापू के नाम से भी गाँधीजी को जाना जाता है। उन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिए अथक प्रयास किये। उपवास किये सत्याग्रह किया दांडी यात्रा की नमक आंदोलन किया। बापू ने ग्रामीणों के लिए उनके विकास के लिए काम किया। गांधी जी मे युग युग से मनुष्यता के विकास द्वारा प्रदर्शित आदर्शों का प्रादुर्भाव समवेत रूप से दृष्टिगत होता है। गांधी दर्शन में राम की मर्यादा ,बुद्ध की करुणा ईसा का प्रेम ,श्रीकृष्ण की अनासक्ति समाविष्ट दिखाई देती है।

महात्मा गांधी ने साध्य पर नहीं साधन पर ध्यान दिया वे कहते थे यदि साध्य पवित्र और मानवीय है तो साधन भी वैसा ही शुद्ध व पुनीत होना चाहिए। उनका फ़र्शन जीवन मानव समाज और जगत का नैतिक भाष्य है। उनकी अहिंसा शब्द प्रतीक रूप में उच्चरित होती है। वे मानते थे कि जगत में जो भी अनैतिक होता है वह हिंसा है। अहंकार स्वार्थ लोलुपता भोग की प्रवृति तृप्ति के लिए किया गया शोषण मात्र है। जो मनुष्य को पशुता की ओर ले जाते हैं।

गांधी जी ने कहा था शस्त्र से शस्त्र का हिंसा से हिंसा का क्रोध से क्रोध का पराभव नहीं किया जा सकता है। वीरता संकल्प धैर्य को आधार बनाकर जगत की सारी दमनात्मक प्रवृति को चुनोती देना चाहिए। गांधी जी की दृष्टि में अहिंसा ही अमोघ शक्ति है। अहिंसा नैतिकता पर आश्रित है। उन्होंने अहिंसा के बल पर उज्ज्वल महान ओर नैतिक पथ बताया।शिवमय सत्यमय ओर चिन्मय ईश्वर सृष्टि का मूल है उसने सृष्टि की रचना किसी प्रयोजन से की है। हमारे देश मे चैतन्य आत्मा की सत्ता को सभी ने स्वीकारा है। जीव जगत सृष्टि व प्रकृति में उसी अनीश्वर चेतन के दर्शन करते हैं । उन्होंने कहा था " जिस प्रकार मैं किसी स्थूल पदार्थ को अपने सामने देखता हूँ उसी प्रकार मुझे जगत के मूल में राम के दर्शन होते हैं। अंधकार में प्रकाश की ओर मृत्यु में जीवन की अक्षय सत्ता प्रतिष्ठित है।

वर्तमान में व्यक्ति हिंसक व्यवहार करने लगा है ऐसे समय गांधी दर्शन को पढ़ने व सुनने की बहुत जरूरत है। एक धोती हाथ मे लकड़ी आंखों पर चश्मा ये था गांधी जी का सादा जीवन। ये महामानव महात्मा थे।सरलता उनके जीवन की विशेषता रही। सामाजिक राजनीतिक अन्तराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे भारत के वे बड़े नेता थे। हम विकास के पथ पर कितने भी आगे क्यों न बढ़ जाये हमें गांधी दर्शन बार बार याद आएगा। गांधी दर्शन युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। गांधी जी का बचपन उनके राजनीतिक विचार सर्वोदय सत्याग्रह खादी ग्रामोद्योग महिला शिक्षा स्वावलम्बन सामाजिक चेतना अस्पृश्यता ये विषय सिर्फ गांधी दर्शन में ही मिलते है जो एक महाशक्ति देश बनाने के लिए बहुत जरूरी है। गांधी दर्शन इसीलिए आज भी प्रासंगिक है क्योंकि इसमें जीव मात्र के कल्याण की भावना निहित है।

अर्वाचीन काल मे पाश्चात्य के पीछे युवा पीढ़ी लगी है जिससे संस्कार व संस्कृति को बचाना मुश्किल लग रहा है। ऐसी परिस्थिति में युवाओं को गांधी दर्शन पढ़ने की आवश्यकता है। भयरहित होजर अंग्रेजों के दमन हेतु उस समय युवाओ को जगाने का महत्वपूर्ण कार्य गांधी जी ने किया था। उन्हें वंचित समूहों के उत्थान के लिए कार्य करने की ओर प्रवृत्त किया था। सच पूछो तो गांधी जी मैनेजमेंट गुरु है। उन्होंने पूंजीवादी व समाजवादी विचारधाराओं का विरोध किया।

गांवों में युवाओं को रोजगार नहीं मिलता तब तक उनमें आक्रोश विक्षोभ रहता है उन्होंने इसीलिए ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की बात कही। घर घर चरखा लगवाया। ग्रामीण रोजगार की तलाश में शहर जा रहे है पलायन रोकना है तो कुटीर उद्योग फिर से लगाने होंगे गांधी जी ने युवाओ को सामाजिक बदलाव लाने का औजार कहा। गांधी जी सत्यनिष्ठ रहकर देशसेवा करते रहे। हमें अपने व्यक्तित्व व राष्ट्र के विकास हेतु गांधी दर्शन की महत्ता समझने की पुनः जरूरत है।

स्वराज सबसे बड़ा है। हम स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन करें। मेहनत से वस्तुएं स्वयं तैयार करें। विदेशी वस्तुओं के भरोसे न रहे। स्वावलम्बी बने आत्मानुशासन रखें।सबसे बड़ा व्रत सत्याग्रह है। अहिंसा को सबसे बड़ा अस्त्र माने। मानवीय गुणों की शिक्षा में ही सारी नैतिकता छिपी है।अतः गांधी दर्शन को जानें।


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