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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

दरख्वास्त

डॉ प्रदीप उपाध्याय

सर,मुझे अभी उज्जैन के लिए निकलना पड़ेगा।मेरे रियल अंकल सीरियस हैं।

अरे आप अभी कैसे जा सकते हो।अभी तो बजट विधानसभा में पेश होना है और जितने विभाग आपके पास हैं,उनकी जानकारी आप ही दे पायेंगे, दूसरे इतनी जानकारी नहीं रखते।आप जैसे काबिल ऑफिसर ही खास समय पर चले जाऐंगे तो कैसे काम चलेगा।

लेकिन सर ,अंकल की तबीयत अब इतनी बिगड़ चुकी है कि डॉक्टर ने भी हाथ ऊँचे कर दिए हैं और अस्पताल से छुट्टी करवाकर उनको घर ले आए हैं कभी भी कुछ भी हो सकता है ।कम से कम उनके आखिरी समय में उनसे मिल लूँगा तो मन में पछतावा नहीं रहेगा।अब तो परिजनों को सूचना कर दी गई है।ऐसे में मेरा जाना जरूरी है।

हाँ,समस्या तो जेन्यूइन है।देखिए ऐसा करते हैं कि कल मंत्रीजी से बजट पर चर्चा हो जाएगी और उसी अनुसार सीएम से डिस्कस हो जाएगा।आप ऐसा करें कि उसके बाद चले जाइए।बाद में तो हम लोग देख लेंगे।आप अपने सेक्शन ऑफिसर को समझा दीजिए।

ठीक है सर।कहकर मैं मायूस होकर उनके पास से चला आया और सोचने लगा कि क्या इस आधार पर धर्मराज से भी दो-चार दिन देर से आकर प्राण हरण करने की दरख्वास्त की जा सकती है!


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