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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

बापू

डॉ सुशील शर्मा

आँख पे चश्मा हाथ में लाठी बापू तुम कितने हो सच्चे। सदा तुम्हारे आदर्शों पर चलते हैं हम भारत बच्चे। करम चंद के घर तुम जन्मे दो अक्टूबर दिवस पवित्र। पुतली बाई की कोख से जन्मा ये भारत का विश्वमित्र। तन पर एक लगोंटी पहने सत्य अहिंसा मार्ग बताया। अपने हक की लड़ो लड़ाई निडर बनो ये पाठ पढ़ाया। अत्याचार के प्रतिकार में नहीं तुम्हारी सानी है। तेरे संकल्पों के आगे नहीं चली मनमानी है। दक्षिण अफ्रीका के समाज पर रंगभेद का साया था। रंगभेद के इस दानव को तुमने मार भगाया था। अंग्रेजों का कालकूट था जलियांवाला नरसंहार। गाँधी का असहयोग आंदोलन बना जुल्म का फिर प्रतिकार। अंग्रेजी चीजों का मिलकर किया सभी ने बहिष्कार। खादी और स्वदेशी नारे बने स्वतंत्रता के हथियार। स्वराज और नमक सत्याग्रह गाँधी के हथियार थे। अंग्रेजी शासन के ऊपर ये हिंदुस्तानी वार थे। दो टुकड़े भारत के देखो सबके मन को अखरे थे। हुआ स्वतंत्र राष्ट्र पर आखिर गाँधी सपने बिखरे थे। तभी एक गोली ने आकार संत ह्रदय को छेद दिया कोटि कोटि जन के सपनों को पल भर में ही भेद दिया। जाति धर्म की दीवारों को गाँधी ने तोड़ गिराया था। त्याग ,सत्य का मार्ग बता कर ज्ञान का दीप जलाया था।

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