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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

सारा पूजन होगा ख़ाक

शुचि'भवि'

देवी तुम पूजो लाख सारा पूजन होगा ख़ाक अगर दिखती नहीं तुम्हें तन पर वस्त्र की जगह मजबूरन धूल व लगी राख जीवित की भूख भूल कर भोग कितना भी तुम लगाओ इस जन्म क्या किसी भी जन्म पुण्य न पाओ अब तो जाग जाओ सच्ची देवी पूज कर मुफ़लिसी कुछ भगाओ अपना अर्थ इस ओर भी लगाओ और झूमते हुए मदमस्त सच्चे भजन गाओ


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