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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

रोटी

सागर कमल

ओ रोटी के घेरे गोल आँख मिला मुझसे तू बोल ओ रोटी के घेरे गोल ! तू मानव की चिर जिज्ञासा आँख-मिचौली तेरी आशा राज़ मगर अब सारे खोल ओ रोटी के घेरे गोल।। तू साँसों का अंतिम पाश उठे , गिरे कितने इतिहास ऐसा कुछ तेरा भूगोल ओ रोटी के घेरे गोल।। नाश हो , निर्माण हो स्वप्न हो , अरमान हो सारा जीवन तेरा मोल ओ रोटी के घेरे गोल आँख मिला मुझसे तू बोल।।

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