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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

अपना खालीपन

रश्मि सिंह

मुझे बेहद प्रिय है मेरा वो हिस्सा जो मुझमें मौजूद तो है पर खाली भी जहाँ मैं रख सकती हूँ अपने सपनों को उठा सकती हूँ ख्वाहिशो के बोझ और भर सकती हूँ एक लम्बी उड़ान ख्वाहिशों के संग उड़ कर चूम सकती हूँ चन्द्रमा के ललाट को नही होगा मेरे उस खालीपन में कोई दोगली दीवार और उस खालीपन मे खुद को ये बताना की कितनी प्रिय हूँ मैं खुद के लिए न जाने कितनी बार खुद को चाँदनी समझ तुम से लिपट कई बातें किया करती हूँ टेढ़ी मेड़ी पगडंडियों पर तुम्हारा हाँथ थामे चलती हूँ तुम जानते हो मेरे इस खालीपन में किसी की दखलअंदाजी नही होती और मैं इसे जीती हूँ बस जीती हूँ खुद के लिए


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