मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

जय अम्बे माँ

महेन्द्र देवांगन माटी

जय अम्बे जगदंबे माता , लाली चुनरी लाया हूँ । भर दे झोली मेरी माता, शरण आपकी आया हूँ ।। दुष्टों का संहार करे माँ , अष्ट भुजी कहलाती है । कोई तुझे पुकारे दिल से , पल में ही आ जाती है ।। भक्त जनों की रक्षा खातिर, धरती में तू आती है । सबके संकट हरती माता , नव नव रूप दिखाती है।। जो भी आये द्वार तुम्हारे , खाली हाथ न जाता है । पूजे जो भी सच्चे दिल से, मनवांच्छित फल पाता है ।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें