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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

गाँधी व शास्त्री को नमन

गरिमा

गाँधी व शास्त्री तुम कहाँ गए, आज आपकी जरुरत फिर भारत माँ को है। हर तरफ अराजकता का बोलबाला है , आतंकबाद का बोलबाला है। न शांति है, न चैन है माँ के आँचल में, भारत माँ ढूंढ रही अपने सपूतो को, गाँधी व शास्त्री आप फिर आ जाओ भारत में, आज आपका जन्मदिन है। इस दिन भी अमन चैन नहीं है, सब एक दूसरे के खून के प्यासे हैं। आओ आज फिर हम सब कसम खायें, गाँधी व शास्त्री का भारत बनायें, यही उनको जन्मदिन की सही बधाई होगी।।


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