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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

कविता

अवनीश सिंह चौहान

हम जीते हैं सीधा-सीधा कविता काट-छाँट करती है कहना सरल कि जो हम जीते वो लिखते हैं कविता-जीवन एक-दूसरे में ढलते हैं हम भूले जिन खास क्षणों को कविता याद उन्हें रखती है कविता याद कराती रहती है वे सपने बहुत चाहने पर जो हो न सके हैं अपने पिछड़ गए हम शायद - हमसे कविता कुछ आगे चलती है


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