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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

विदाई देता हूँ

डी एम मिश्र

प्यासे भौंरों को अमराई देता हूँ तपते मौसम को पुरवाई देता हूँ शिद्दत से महसूस करो उनकी पीड़ा दिल वालों को पीर पराई देता हूँ ख़्वाबों और खयालों में तो हूँ अब भी कैसे कहते हो तन्हाई देता हूँ पुत्र शोक भी भूल गये जो वतन के लिए माता -पिता वो धन्य , बधाई देता हूँ जो शहीद हो गये देश की रक्षा में नम आँखों से उन्हे विदाई देता हूँ उनके आगे बस रख दिया था आईना दुश्मन जैसा उन्हें दिखाई देता हूँ

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