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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

भोजपुरी गजल
हरदम साथ रहलीं

विद्या शंकर विद्यार्थी

तोहरा जोरे हम हरदम साथ रहलीं, कइसे कहीं कि इम्तिहान ना भइल । तोहरा जाए से तनीका दिल दरकल, कइसे कहीं कि कुछ जियान ना भइल । दरपन के सोझा सिंगार अधूरा लागेला, कइसे कहीं कि कुछ नुकसान ना भइल । बिहँसे के दिन ना रहल अब सपनो में, कइसे कहीं कि लहू अरमान ना भइल । नीर ढरकल तऽ भींजल अँचरा विद्या, कइसे कहीं कि नेह नेहान ना भइल ।

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