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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 71, अक्टूबर(द्वितीय), 2019

गाँधी जी के बंदर

महेन्द्र देवांगन माटी

गाँधी जी के तीनों बंदर , बहुत धूम मचाते थे । उछले कूदे डंगालों पर , सबको नाच दिखाते थे ।। इस डाली से उस डाली पर , कूद कूद कर जाते थे । खट्टे मीठे फल देखकर, खूब मजे से खाते थे ।। बच्चे उसको बहुत सताते , मार गुलेल भगाते थे । इधर उधर सब भागा करते, खूब छलांग लगाते थे ।। बंदर बोले सुन लो बच्चो, बात ज्ञान की कहता हूँ । गाँठ बाँध कर इसे पकड़ लो , कैसे मैं चुप रहता हूँ ।। करो नहीं तुम कभी बुराई , आपस में मिलकर रहना । सत्य मार्ग पर चलते रहना , झूठ कभी ना तुम कहना ।। बुरा न देखो बुरा न सुनना , बुरा नहीं तुम बोलो जी । अडिग रहो तुम सत्य मार्ग पर , आँखें अपनी खोलो जी ।।

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