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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018


सच करके दिखा दें


पुष्पा मेहरा


                       
विश्वास का संकल्प ले लें, आस की धूनी रमा लें, 
पाषाण सी राहें भी सारी, फूल सी हो जाएँगी |
 
प्रेम का अनुबंध रच लें, नेह–सर में डूब लें हम, 
नफ़रतों की दीवार सारी, आओ ! सब मिल कर ढहा दें|

दया का दरया बहा दें,  त्याग के कुछ मन्त्र बाँटें ,
परोपकार की हर रोशनी को,  इस अंध-वन में जगा दें |

सत्कर्म से ना हार मानें, दुःख दर्द सारे मिलके बाँटें ,
अपने–अपने ख़्वाबों को, हम सभी सच कर के दिखा दें |    

सूर्य का सा तेज हममें, शीतल समीरण हैं हमीं ,
अग्नि दाहक बन जलाते, जल-धार  बन बुझाते हमीं |

नदी सी गति है हमारी,चाँद सी शीतलता है हम में , 
हम अलग भी एक हैं, मन में सदा यह सत्य धारें |

रुक के नहीं, झुक के नहीं, गर्व से नहीं, मान से नहीं,
बाधाएँ सब जो भी मिलें, हँस कर उनसे पार पा लें | 

लक्ष्य कितने ही पृथक हों, समय कभी यदि साथ माँगे,
एक दूजे के काँधे से काँधे मिला, आओ सारे भार बाँटें |

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