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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018


गुलाब के दिलों की वेदना


नवीन कुमार भट्ट


             
मेरे दिल की सुनो कहानी।
है सदियों की रीत पुरानी।।

कितनी ममता भरी हुई है,
रोम रोम में भरी जवानी।।

प्रेम भरी राहों पे चलकर,
सबको देता एक जुबानी।।

नफरत की दिवाल तोडो,
दे दो इसकी अब कुर्बानी।।

कांटे है पर सीख लिया हूँ।
प्रेम रूप की तीर चलानी।।

ये लगे न कांटा अंतर्मन मे,
फैलें न ये अब कोई ग्लानी।।

सावधान होकर के करिए,
सीखा मैने अब राह बतानी।।

पहली बार गलत गर करता,
क्या गलती है उसे जतानी।।

खुशियों का उपहार समर्पित,
हर घर जाकर अलक जगानी।।

सीचो दिल को मीठे स्वर पर,
गुलाब देता हूँ संदेश तुफानी।।
 

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