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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018



बच कर रहना


डॉ० अनिल चड्डा


 
दुश्मनों की तारीफ से बस तू बच कर रहना,
कायदा इनका सच्चाई से हट कर कहना।

चलना है तो राह में काँटे भी मिलेंगे,
बढ़ना है तो छोड़ दे तू डर कर रहना।

साँस है तो आस सदा कायम ही रखना, 
जीते जी संसार में क्यों कर मर कर रहना। 

नाहक मारना चाहता पतंगा जल कर,
शमा का तो जीवन ही है जलते रहना। 

सच्चा है गर मन तो बात को ठोक के कहना,
फितरत में क्यों लाता है तू दब कर रहना। 		 
 

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