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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018



करवा चौथ


डा.नीना छिब्बर


प्रेम के एहसास का साक्षात ,साकार रूप धरती पर उतर आए और चाँद भी अपनी चाँदनी की मधुर स्मृति में हृदय की झंकार बड़ा दे ,ऐसा पर्व है करवाचौथ।पति पत्नी के बीच हरवर्ष नवीनीकरण लाता है यह दिन।सप्तपदी के चौथे फेरे सा अडिग जहाँ कन्या आगे चल कर काल को भी चुनौती देती है। अग्नि की पवित्र उष्मा और प्रकाश से उज्ज्वल जीवन रहस्य की परतें खोलता यह पर्व।

इंद्र्धनुष के सात रंगो को समेटे, नारी के सौंदर्य को इंद्र्धनुषी झूले में सहलाती है यह रीत।बिंदिया की दमक, सिंदूर की लालिमा, लाल चूडे की चमक और पायल की झंकार से भरता नर-हृदय को यह पर्व । पति के हृदय मे नवोढ़ा प्रिया के नवरूप को निहारने की लालसा लाता है यह पर्व ।

सात सुरों का पहला सुर सा (सिंदूर)से आरंभ हो सा (सुहागन,)पर समाप्त होता हर गीत।नारी के जीवन में प्रेम प्रतीक साजन वो आँठवा सुर है जिसे हर नारी आखिरी साँस तक गुनगुनाना चाहती है ।माँग की आभा लिए जीने मरने का पर्व है करवाचौथ।जीवन की हर डगर पर साथ चलने की प्रथम प्रेमल कसम है यह चाँद रात। जहाँ सात वचनो की पुनरावृत्ति शब्दहीन हो ,भावो मे प्रकट हो जाती है।गठबंधन मे बंधे जीवन रिशतो को सहलाने का यह दिन है।

मेंंहदी रचे हाथों पर,आस्था विश्वास, सौहार्द का रंग चढ़ाता है यह पर्व।भीतर की कठोरता को पिघला कर ,चाँद की प्रतीक्षा मे खड़े युगल सा प्यारा यह आत्मीय पर्व।स्नेह और अंतस की जल राशि से नारी हृदय की प्यास को तृप्त करने का पर्व करवाचौथ।

एक दूसरे के प्रति दृढ़ विश्वास ,अपनत्व श्रृद्धा को निरंतर अक्षुण रखता है यह पर्व ।यह पर्व उत्साह पूर्वक हर नारी के जीवन मे आए इसी आंकाक्षा को पूरा करने की प्रार्थना का वचन है करवाचौथ ।


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