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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018


कौन हो तुम


रवि प्रभात


                        
दोस्त हो या प्यार हो
या कोई अहसास हो तुम 

शब्दों के जाल में उलझे हो तुम
पर मेरे लिए तो खास हो तुम

आँखो का पानी हो तुम 
मुँह पे रौनक हो तुम

सांसो की जरुरत हो तुम 
धड़कन की ठंडक हो तुम

नाम तुम्हारा कुछ भी हो
पर मेरे लिए तो खास हो तुम

रातों के सपनो में तुम
पूजा के घंटी में तुम

सुख चैन में तुम
दुःख दर्द में तुम 

सूरज के लाली  में तुम
चाँद के रौशनी में तुम 

मेरे साथ भी हो तुम
मेरे से दूर भी हो तुम

नाम तुम्हारा कुछ भी हो
पर मेरे लिए तो खास हो तुम

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