Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018



मैं तो कोई गिला नही करता


अनिल मानव


           
मैं तो कोई गिला नही करता,
पर ये दिल है सुना नही करता।।

हार जाता है आदमी अक़्सर,
जो क़भी हौसला नही करता।।

दूसरों से भला कहूँ कैसे,
मेरा अपना दुआ नही करता।।

कौन अपना है या पराया है,
फ़र्क़ ये आइना नही करता।।

भूख इंसान को हराती है,
कोई इतना गिरा नही करता।।

जो लगा है फ़क़त गिराने में
वो कभी भी उठा नही करता।।

बात ग़र हो अना की तब मानव,
सर कभी ये झुका नही करता।।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें