Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018


पर्यावरण बचाओ


महेन्द्र देवांगन "माटी"


             
पेड़ लगाओ मिल सभी,  देते हैं जी  छाँव ।
शुद्ध हवा सबको मिले  , पर्यावरण बचाव ।।1।।

पेड़ों से मिलती हमें , लकड़ी फल औ फूल ।
गाँव गली में छोरियाँ  , रस्सी बाँधे झूल  ।।2।।

पर्यावरण विनाश से,  मरते हैं सब लोग ।
कहीं बाढ़ सूखा कहीं,  जीव रहे हैं भोग ।।3।।

जब जब काटे वृक्ष को , मिलती उसकी आह ।
भुगत रहे प्राणी सभी  , ढूँढ रहे हैं राह ।।4।।

सड़क बनाते लोग हैं  , वृक्ष रहे हैं काट ।
पर्यावरण विनाश कर , देख रहे हैं बाट ।।5।।

पानी डालो रोज के  , पौधे सभी बचाव ।
मत काटो तुम पेड़ को , मिलजुल सभी लगाव ।।6।।

पंछी बैठे डाल में  , फुदके चारों ओर ।
चींव चींव करते सभी  , होते ही वह भोर ।।7।।

पेड़ों से मिलती हवा , श्वासों का आधार ।
कट जाये यदि पेड़ तो  , टूटे जीवन तार ।।8।।

माटी में मिलते सभी  , सोना चाँदी हीर ।
पर्यावरण बचाय के  , समझो माटी पीर ।।9।।

दो दिन की है जिंदगी  , समझो इसका मोल ।
माटी बोले प्रेम से  , सबसे मीठे बोल ।।10।।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें