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वर्ष: 3, अंक 47, अक्टूबर(द्वितीय) , 2018


हमारी गाय


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


                     
गाय हमारी सबसे न्यारी ।
वह तो है घर भर की प्यारी ।।

बड़े चाव से दाना खाती ।
जंगल नित चरने को जाती ।।

रंभाती घर आती है ।
बछड़े को दुध पिलाती है ।।

उसकी सेवा करना है ।
दुध - मलाई खाना है ।।

तन को स्वस्थ बनाना है ।
हिष्ट-पुष्ट हमें बनना है ।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें