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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 94,अक्तूबर(प्रथम), 2020

हिंदी पर हाइकु

डा. प्रेमलता चसवाल 'प्रेमपुष्प'

1. स्वर में मीठी प्रकृति में सरल मेरी हिंदी। 2. मेरी हिंदी ये विश्व-विमोहनी भाषा प्यारी 3. प्रकृति-सी मानव हितकारी ये हिंदी प्यारी 4. वैश्विक सोच मानव हितकारी भाषा हमारी 5. शब्द विभाषी विश्व बंधुत्व हित ढले हिंदी में 6. ढले हिंदी में प्राकृतिक रूप से शब्द सहर्ष 7. जन चहकें जग की भाषा हिंदी फूले महके 8. जागो विहंग देखो! बुल्के से कई हिंदी फैलाए 9. नई बयार विश्व बंधुत्व हित हिंदी तैयार 10. नीर-क्षीर-सी यूं हिलमिल जाती हर्षित हिंदी

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