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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन" एवं विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा, चैप्टर
मध्य प्रदेश के तत्वावधान में स्वराज संचालनालय संस्कृति
विभाग ,भोपाल परिसर में " जय हिंद- जय हिंदी" उत्सव

बच्चा बोले जो प्रथमाक्षर 
मीठा सा शब्द ,हिंदी में 'मां' 
हिंदी जो ,सत्तर प्रतिशत गांवों की,अमराइयों की महक सी, 
खिला जाती है घर अंगना,
लोकगीतों का गुँजन,
भारत  की  धड़कन है हिंदी
भारत अगर  शरीर है तो उसकी धमनियों में प्रवाहित रक्त है हिंदी।

ऐसी ही कुछ भाव भूमि रही

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या ,तेरह सितंबर को वैचारिक संशोधन , सामाजिक सरोकार और साहित्यिक उन्नयन हेतु प्रतिबद्ध संस्था " आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन" एवं विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा, चैप्टर मध्य प्रदेश के तत्वावधान में स्वराज संचालनालय संस्कृति विभाग ,भोपाल परिसर में " जय हिंद- जय हिंदी" उत्सव में, जिसमें प्रमुख साहित्यकारों ने " हिंदी और हिंदी दिवस" को शब्दबद्ध करते हुए ,देश को एक सूत्र में बांधने वाली,भारत की गौरवशाली इतिहास, साहित्य ,संस्कृति,संस्कारों की संवाहक,संरक्षक ,माँ की बोली सी मीठी, हमारी मातृभाषा हिंदी पर अपना प्रेम, सम्मान रचनाओं में उकेर ,उसे शब्दों से अलंकृत कर किया और समस्त वातावरण को हिंदीमय,आनंदमय बना दिया।

भारतेंदु हुए निराश , हुई ना पूरी आस।
निज भाषा की बंदगी, होगी कब  ये खास।। @श्यामा गुप्ता।

हिंदी के ममत्व और प्रयोग धर्मिता से नहीं इंकार,
कर लेती है मान दे , अन्य भाषाएं भी  स्वीकार ,
बने  अधुनातन पर ,
अपनी जड़ें न भूलें हमवतन
सभी भाषाएं सीखे हम  
पर सबसे पहले अपनी हिंदी को दें  सम्मान ,हिंदी से हो प्यार।
न रहे राष्ट्र अब और गूंगा
हिंदी को मिले स्थान सबसे ऊंचा
जन जन की अभिलाषा
हिंदी बने  अब राष्ट्रभाषा।

@अनुपमा अनुश्री

तुलसी, मीरा अमीर ,खुसरो में,
मेरा हिंदुस्तान है हिंदी ।
उसको भला मैं अपना कैसे कहूं, तुझसे जो बदगुमान है हिंदी।
@ डॉ ओरिना अदा।

बोली भरी मिठास की
जो थी अपने पास,
शनैः शनैः वो गुम हुई  
 ...@मधुलिका सक्सैना

सुख तो हिंदी भाषा में है,  जिसका कोई मोल नहीं है @ मृदुल त्यागी


मातृभूमि है भारत अपनी , हिंदी  अपनी भाषा है। @मनोज देखमुख


जन जन का परिचय है हिंदी, कर्तव्य बोध भी है हिंदी। @ क्षमा पांडे

भाषा को हक दे गया यूं तो संविधान।
कहां आमजन दे पाया इसे सम्मान। @अरविंद जैन

राजमहल से लेकर झुग्गी तक जिसका सहज प्रवेश है।
जन-जन की भाषा बने,  हिंदी से ही जाना जाता देश है।। @सुधा दुबे।

साहित्य की यह रीढ़ है, हिंदी हमको जान से प्यारी @ अमित मालवीय हर्ष।

देसी होके बोल विदेशी,  मन ही मन भरमाते हैं,
मातृभाषा और मातृभूमि का मान नहीं रख पाते हैं।
@ बिंदु त्रिपाठी

जहां में सारे,घुल मिल गई है हिंदी।
भावनाओं का प्रतिबिंब है हिंदी।।@ शोभा ठाकुर

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ प्रेम भारती वरिष्ठ साहित्यकार ने की, विशिष्ट अतिथि महर्षि अगस्त्य वैदिक शोध संस्थान केंद्र भोपाल के निदेशक डॉ प्रभुदयाल मिश्र , श्री महेश सक्सैना , श्री युगेश शर्मा ,वरिष्ठ साहित्यकार ममता श्रीवास्तव थे।

साथ ही " हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी " विषय पर विशेषज्ञों, चिंतकों और गणमान्य अतिथियों द्वारा विमर्श किया गया । हिंदी के समक्ष चुनौतियां और वर्तमान दौर के साथ उसकी गतिशीलता, निरंतरता पर चिंतन विमर्श हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ प्रेम भारती जी ने कहा कि भविष्य की हिंदी अनुवाद की हिंदी है हम उसे सशक्त करना चाहिए । हिंदी है हम सब का सम्मान, इसे झुकने नहीं देना है। आजादी मिली थी पुष्प के माध्यम से, इसे कभी मुरझाने नहीं देना है ।" वही कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभु दयाल मिश्र ने कहा कि संस्कृत वेद भाषा संस्कृत से उद्घृत हिंदी ,अपने शब्दकोश में इतनी प्रचुर है कि उसे कभी कमजोर नहीं समझा जा सकता। वहीं विदेश में हमारी भारतवंशी प्रतिभाएं हैं उन्होंने विभिन्न माध्यमों से हिंदी को बनाए रखा है। उसका स्वरूप विदेशों में भी अक्षुण्ण है। वहीं विशिष्ट अतिथि महेश सक्सेना जी ने कहा कि हमें सकारात्मक पक्ष देखना है और हिंदी सशक्त है अपने आप में कि अंग्रेजी भारत में कभी भी सिहासन आरूढ़ नहीं हो सकेगी।

विशिष्ट अतिथि युगेश शर्मा जी ने हिंदी की सामाजिक स्थिति पर अपना दृष्टिकोण अपने वक्तव्य में रखा कि "आजादी के 72 वर्ष बाद भी राष्ट्रभाषा का दर्जा हिंदी को न मिलना सियासत की कमजोरी है। भारतवासियों को दमदार इसे हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की तरफ बढ़ना होगा। बाजार हिंदी को रोम नागरी में लिख रहा है और देवनागरी लिपि को कमजोर कर रहा है। अनुराग श्रीवास्तव, राजकुमारी चौकसे , उषा सक्सेना की विशेष उपस्थिति थी।

तकनीकी दौर में जहाँ सर्वत्र अंग्रेजी का बोलबाला है हिंदी , ‘हिंगलिश’ हुई जा रही है ,वहां अपनी भाषा को स्थायित्व प्रदान करने हेतु राजनीतिक संरक्षण दिया जाना शुभ संकेत हो सकेगा।उदारमना हिंदी व्यापकता के साथ अन्य भाषाओँ के छीटों को भी समाहित करते हुए समृद्ध ,स्वस्फ़ूर्त प्रवाहित हो ,भारत की एकजुटता को सम्बल प्रदान करते हुए हमारी संस्कृति की संवाहक बने और विश्व भाल पर चन्दन सी महके।

यह वक्तव्य दिया आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन एवं विश्व हिंदी संस्थान कनाडा चैप्टर मध्य प्रदेश की अध्यक्ष अनुपमा अनुश्री ने।

सभी प्रतिभागी बच्चे जिन्होंने" हमारी हिंदी भाषा और हमारा योगदान" विषय पर आलेख प्रस्तुत करके हमारी मातृभाषा हिंदी के प्रति अपनी समर्पित भावना,निष्ठा दर्शाई , उनका अभिनंदन किया गया।

सभी रचनाकारों और शिक्षाविद, गणमान्य अतिथियों ,चिंतकों, ने एक सुर में यही कहा कि हिंदी जो हमारे देश भारत की आत्मा है उसे संरक्षित करना, उसके पठन-पाठन और प्रचार-प्रसार में हम सभी योगदान बहुत आवश्यक है ,ताकि हमारी भावी पीढ़ी हमारी गौरवशाली संस्कृति और परंपराओं से मजबूती से , अभिन्न रूप से जुड़े और उसका बहुत बड़ा सेतु है हिंदी, क्योंकि हर भाषा में उसकी संस्कृति छुपी होती है तो हम आयातित भाषा की छदम संस्कृति से परहेज करें , उधार की रोशनी से नहीं बल्कि अपनी स्व भाषा की आभा और उजास से आलोकित रहें। भाषा और अपनी संस्कृति को अपनी जड़ों से जुड़े और अपना , अपने देश का और स्वभाषा का मान बढ़ाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार ,हिंदी प्रेमी और विज्ञ जन उपस्थित थे।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें