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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

गौर से पढ़िएगा

सलिल सरोज

यह इतिहास है गौर से पढ़िएगा एक एक सीढ़ी तौर से चढ़िएगा सच और झूठ एक ही सफे पर विश्वास ना हीं और से करिएगा जो शासक चाहे वही यह बोले फिर आप हर दौर से डरिएगा जो जानते हैं वो भी सच है क्या नहीं तो बिना ठौर के मरिएगा

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