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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

संदेश

राजीव कुमार

बेटे ने दर्जनों चिट्ठी का कोई जवाब नहीं दिया तो माँ की ब्याकुलता बढ़ी। घर से भाग कर जाने के बाद रंजन ने सिर्फ एक ही चिट्ठी अपने माँ को लिखी, अपनी कुशलता की। रंजन के सिवाय उसकी माँ उस माँ कोई नहीं था। रंजन की माँ हमेशा यही सोचती कि जब उसका गुस्सा शांत हो जाएगा तो आप ही आ जाएगा। इसी इन्तजार में रंजन की माँ हर रोज रंजन के हिस्से का खाना पिछले दो साल से पका रही है। रंजन की माँ अतीत में खो जाती है , रजन की कही हुई बात में ’’ नहीं माँ, अभी शादी नहीं करूंगा। ’’ यह बात रंजन हमेशा अपनी माँ से कहता।

रंजन की माँ उसको समझाती और कहती ’’ बेटा, तू कमाने बाहर चला जाएगा तो मैं अकेली हो जाउंगी। जिद् मत कर, शादी कर ले। ’’ रंजन जवाब में कहता ’’ नहीं माँ, घर बनाने के बाद ही शादी करूंगा। ’’

रंजन की माँ अतीत से बाहर आते ही सोचती है कि व्यर्थ ही रंजन पर गुस्सा किया। मैं भी क्या करती, बहुत मुश्किल से मेरे पिता जी रिश्ता लेकर आए थे। रात भर जाग कर रंजन की माँ ने रंजन के लिए पकवान तैयार किया और लल्लू के हाथों, रंजन को संदेश भिजवाया। अभी लल्लू शहर के लिए निकला ही होगा कि रंजन अपनी कुशलता का संदेश बनकर माँ के सामने खड़ा था। रंजन की माँ की खुशी का कोई ठीकाना नहीं रहा।


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