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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

सफर

राजीव कुमार

सफर करना रामेश्वर को बहुत अच्छा लगता था। नए सफर की योजना बन चुकी थी। सफर में जाने से पहले रामेश्वर ने अपनी पत्नी से कहा ’’ सफर में किसी को टोका नहीं करते और न आँसू ही बहाया करते हैं। ’’ रामेश्वर ने अपनी पत्नी के आँसु पोंछे और गले लग गया। रामेश्वर ने अपनी कलाई घड़ी पे दृष्टि डाली और तीव्र गति से रेल लाईन की तरफ दौड़ा, उस पार जाकर बस पकड़ना था। रेल गाड़ी के क्राॅस करने से पहले ही पहुंच जाना चाहता था उस पार। बिना फाटक वाली जगह से ट्रेक पार करना चाहा, उसके सफर ने उसको उकसाया कि वो रिस्क ले और भाग्य को आजमाए। ट्रेक पार करने से पहले ही ट्रेन ने उसको कुचल दिया। रामेश्वर के मुख से यही निकला ’’ नहीं से देर भली। ’’ और रामेश्वर निकल गया अन्तिम सफर पर।


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