मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

लक्ष्य

पवनेश ठकुराठी 'पवन'

बारहवीं की कक्षा में अध्यापक ने विद्यार्थियों से पूछा- "बच्चों ! आपके जीवन का लक्ष्य क्या है ?"

अधिकांश विद्यार्थियों ने जवाब दिया कि हमने अभी सोचा नहीं या फिर हमने अभी लक्ष्य निर्धारित ही नहीं किया।

तब अध्यापक ने उनसे कहा- "एक विद्यार्थी को आठवीं कक्षा में पहुंचने तक अपने लक्ष्य का अवश्य निर्धारण कर लेना चाहिए। जब आपको पता रहेगा कि आपको जाना कहाँ है, तब आप उस स्थान पर पहुँच सकते हैं। स्थान का पता न होने पर आप इधर-उधर भटकते रह जायेंगे। इसलिए जीवन में सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारित कीजिए और उसकी प्राप्ति हेतु निरंतर परिश्रम कीजिए।"


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें