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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

बेटियां मेरी बड़ी होनहार.......

वीरेन्द्र कौशल

बेटियां मेरी बड़ी होनहार रंजना छवि मानों त्योहार दिल साफ नीयत साफ घर आयी ख़ुशियां अपार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... बचपन खेला घर महकाया हर किसी से प्यार पाया सब की वो राजदुलारी चंचल स्वाभाव महकायें क्यारी बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... हर पल करती सब की सेवा ऐसा मिले सबको मेवा बड़ी गुणकारी करें परोपकार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... पल में माँ सी डांट पिलायें पर कोई चीज ना बांट पाये हर घर में हो ऐसे त्योहार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... चुटकियों में समास्या सुलझायें जादू इनका सब पर छाये हर जगह हों ऐसे संस्कार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... पल में सबका मन हर लेती गैरों के भी पर लगा देती नानी दादी सी त्योहार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... घर की हैं अलबेली शान बहना अपनी की प्यारी जान सब पर लूटाती अपना प्यार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... माँ का रूप पिता का अंश रोशन करेगी नया वंश एक नजर पहचानें सार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... आवलें सी हैं कल्याणकारी हल्दी सी बहुत गुणकारी बड़ी भोली लिये प्यार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... सादा जीवन ऊँचे ख़्वाब पार किये सभी पडाव पूजा इबादत अरदास गुलनार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... सहेलियां जैसे खुशबू द्वारा दूर करे सदा अंधियारा मेहकायें जग सारा अपार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... पिता की जैसी मजबूरी पूरी मानी समझ जरुरी चेहरा सदा प्रफुल्लित बारम्बार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... दुर्गा की टोली बिमला की फौज ईश्वर की हवेली इन्द्रजीत की मौज संस्कारों को दे नयी रफतार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... उम्मीद नहीं ये आरजू हाथ नहीं मेरी बाजू इन सहारे समय की धार बेटियां मेरी बड़ी होनहार....... बेटियां मेरी बड़ी होनहार.......

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