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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

नई बुलंदियों को पाने हम चले है

संगीता चौरडिया

आसमां को झुकाने हम चले है , नई बुलंदियों को पाने हम चले है । है भरोसा मुझे खुद पर यूं ही नही तुफानो से बाजी लगाने हम चले है । हो सफर कितना भी मुश्किल , क्या फरक है , मेरे इरादे भी उसी पंछी की तरह कड़क है जिसके ऊपर आसमां , नीचे जमीं है , लेकिन उसके विश्वास में कहा कमी है । उसी पंछी की तरह पर फैलाने हम चले है , जिंदगी के नए गीत गाने हम चले है । आसमां को झुकाने हम चले है , नई बुलंदियों को पाने हम चले है ।

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