मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

बह जाऊंगा मैं भी

राजीव डोगरा

बरसती बरसातों में बह जाऊंगा मैं भी, तेरी याद आती यादों के संग। टूटकर बिखर जाऊंगा, किसी गुमनाम पत्थर की तरह, और बह जाऊँगा किसी चीखती नदी में ले तेरी यादों को संग। लोग ढूंढेंगे मुझे इन बरसती बरसातों में, हवा में उड़ते किसी अजनबी अश्क़ की तरह। पानी में बहते, किसी गुमनाम पत्ते की तरह। मगर मैं खो जाऊंगा, तेरी यादों को ले संग किसी गुमनाम तूफान की तरह।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें