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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

प्यारी हिंदी

पुनीत कुमार पाण्डेय

मेरी पहचान है हिंदी, मेरा अभिमान है हिंदी, स्वाभिमान सम्मान है हिंदी, आत्म रूप अभिज्ञान है हिंदी, भाषाओँ में प्रधान है हिंदी, देववाणी की संतान है हिंदी, रसों की धनवान है हिंदी, विचारों में बलवान है हिंदी, तीव्र-त्वरित बुद्धिमान है हिंदी, मृदुल कंठी और दयावान है हिंदी, जीवन राम तो हनुमान है हिंदी, हिन्द की धरती आसमान है हिंदी, हम हैं हिंदी हिंदुस्तान है हिंदी, मेरी हिंदी प्यारी हिंदी!


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