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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

सनम

गौरव श्रीवास्तव

आपकी आंखों की नींदों में, हमे ठहर जाने तो दे, आपके होंठों की मुस्कराहट में, हमे खिलखिलाने तो दे, आपके बातो की इन गीतो में, हमे गुम हो जाने तो दे, क्या खबर इस जिंदगानी का सनम, हमे आपके साथ कुछ वक्त बीताने तो दे। आपके पायल की खनखन में, हमे झूम जाने तो दे, आपके बाहों की उलझन में, हमे मदहोश हो जाने तो दे, आपके आदाओ की साये में, हमे खो जाने तो दे, क्या खबर इस जिंदगानी का सनम, हमे आपके साथ दिल लगाने तो दे।


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