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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

हिदी दिवस

गरिमा

हिन्दी हमारी जान है, हिंदी हमारी शान है। हिंदी हमारी बोली है, फिर भी हिंदी उदास है। हिंदी हमारी चेतना है, हिंदी हमारी संस्कृति है। हिंदी हमारी वेदना है, फिर भी हिंदी उदास है। हिंदी हमारी आत्मा है, हिंदी हमारी संवेदना है, हिंदी हमारी लाज है, फिर भी हिंदी उदास है। हिंदी हमारी अस्मिता है, हिंदी हमारी मान है, हिंदी के बिना सब कुछ बेकार है, फिर भी हिंदी उदास है। हिंदी हमारी वाणी का अभिमान है, हिंदी मां सरस्वती का वरदान है, हिंदी हमारी साधना है, फिर भी हिंदी उदास है।।


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