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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

इन्सानी फितरत

अनिल कुमार

गलती मैं भी करता हूँ भूलें अपनी मैं भी दोहराता हूँ पर अमन चेन से बैठा कभी कुछ अन्तर्मन की सुन आत्म-विश्लेषण से थोड़ा सुधार उनमें लाता हूँ क्योंकि जानता हूँ इन्सानी फितरत को गलतीकरना फिर दोहराना बार-बार यही पाता हूँ गलती मैं भी करता हूँ भूलें अपनी मैं भी दोहराता हूँ लेकिन जब भी फुरसत में होता हूँ मैं अपने मन की गहराई में थोड़ा और उतर जाता हूँ फिर कुछ बदलावों से थोड़ा परिवर्तन के चावों से अपने में कुछ परिवर्तन लाता हूँ गलती मैं भी करता हूँ भूलें अपनी मैं भी दोहराता हूँ गलती करना मेरी आदत नहीं पर फितरत है मानव की होती है और दोहराई भी जाती है लेकिन मैं उस फितरत को थोड़ा बहलाकर समझाता हूँ गलती मैं भी करता हूँ भूलें अपनी मैं भी दोहराता हूँ मैं और सब ही गलतीकरते हैं क्योंकि सब अपनी अपनी फितरत की सुनते हैं इसीलिए तो गलती कर गुजरते है बस अन्तर है थोड़ा उनमें और कुछ मुझ में मैं गलती करता हूँ पर उस पर आत्मविश्लेषण तक जाता हूँ गलती करके भी कुछ परिवर्तन खुद में कुछ अपनी फितरत में लाता हूँ गलती मैं भी करता हूँ भूलें अपनी मैं भी दोहराता हूँ।


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