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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

रावण-दहन

आदित्य अभिनव

सुना है विजयादशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाने वाला त्योहार है । कथा है कि राम ने इसी दिन रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय पताका फहरायी थी । लेकिन, रावण मरा नहीं था; तभी तो हर वर्ष, इसी दिन रावण को मारने की कोशिश होती है । पिछले साल रावण-दहन में रावण का पुतला पचास फीट का था, इस साल है पचपन का, और बढने का यह क्रम कई वर्षों से चल रहा है अनवरत । मेरे जैसा आम आदमी यह समझ नहीं पाता कि, रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद तो, प्रत्येक वर्ष बढ़ रहे हैं, लेकिन नंगे पाँव तीर को धनुष पर चढ़ाये रावण को घूरता आँखों से आग उगलता चेहरे से आक्रोश व्यक्त करता राम, ज्यों का त्यों क्यों है ज्यों का त्यों क्यों है ।

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