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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

जूते

आदित्य अभिनव

इस भूमंडलीकरण के दौर में, जब चमक ही पहचान बन गई है ; जूतों ने , पहन लिये हैं आदमी और बढ़ रहे हैं , तेज कदमों से बाइसवीं सदी की ओर , जहाँ ईश्वर , अपने अस्तित्व को ढूढ़ने में निमग्न है ।


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