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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

अंकुर अनंत का

आदित्य अभिनव

पानी की छुअन एक सिहरन है वसंती हवा का झोका हमें रंगता है अपने रंग में पक्षियों का कलरव धरती का आदि संगीत है नदियों के कल-कल ध्वनि में भी एक लय है । सूरज की लालिमा व चाँद की चाँदनी हमारे अंदर करती है ऊर्जा और उल्लास का प्रसार और फूलों का खिलना करता है सौरभ का संचार । ऐसा नहीं कि , प्रकृति , ये सारे व्यापार कभी-कभी करती है, यह तो है उसका नित्य व्यवहार लेकिन , हम उन्हें नहीं देख पाते क्योंकि देखना , आँखों को खोलकर दृष्टिपात करना मात्र नहीं है ; यह तो है अंतर्मन तक उतारना असीम के रस, रंग ,रूप ,गंध और स्पर्श को जिससे फूट पड़े , हृदय में अंकुर अनंत का ----


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