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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

न खयालों के पर निकलेंगे

सतविन्द्र कुमार राणा

खुद से ना बाहर निकलेंगे न खयालों के पर निकलेंगे। गैरत की बातें ना होंगी दीन सभी मर कर निकलेंगे। बंदिश जब साँसों पर होगी हर कूचे से स्वर निकलेंगे। स्वाद धूप का चख लेंगे जो वे ठंडक भर कर निकलेंगे। ऊँचे जिनके दिखते मकतब अदबी वो कमतर निकलेंगे। मोहक मूरत मन मोहेगी अंदर बस पत्थर निकलेंगे।

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