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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 70, अक्टूबर(प्रथम), 2019

लौकी और कद्दू की लड़ाई

डॉ सुशील शर्मा

कद्दू से लौकी भिड़ बैठी खूब मची लड़ाई है। ऊबड़ खावड़ से तुम लगते तुम मोटे से भद्दू राम। तुम्हे देख कर मुँह बिचकाएँ नाम तुम्हारा कददूराम। पेट तुम्हारा थुल थुल देखो गर्दन कितनी छोटी है। ठुमक ठुमक कर तुम चलते हो पीठ तुम्हारी मोटी है। सब्जी नहीं तुम्हारी अच्छी तुम में न चतुराई है। ओ लौकी तुम दुबली पतली मुझसे पंगा मत लेना। जैसा भी हूँ तुमसे अच्छा क्या तुमसे लेना देना। लूली लंगड़ी लम्बी पतरुल मुझसे न यूँ घात करो। सब सब्जी से नीचे हो तुम ज्यादा न तुम बात करो। सूरत देख कर बच्चे रोते तुम में कौन बड़ाई है ? आलू दादा बीच में बोले तुम दोनों हो सबसे सच्चे । दोनों औषधि के गुण वाले दोनों वैद्यराज के बच्चे। अवगुण नहीं किसी के देखो गुण का तुम सम्मान करो। दूजे को कमतर दिखला कर मत इतना अभिमान करो। स्वास्थ्य के वर्धक हो तुम दोनों दोनों में अच्छाई है।


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