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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 97,नवम्बर(द्वितीय), 2020

दर्द दे कर भी प्यार था लिया

डॉ० अनिल चड्डा

दर्द दे कर भी प्यार था लिया, यार ने कैसा था जुल्म किया। फिर से घूम के वहीं आ गये हम, जहाँ से सफर था शुरू किया। गौर से सुना मैंने धड़कनों को, सबने था नाम तेरा ही लिया। फूल ने भी खुशबू से कह दिया, चल जा आ गया है मेरा पिया। वो हमसे पूछते हैं अपना पता, आओ रहो, है तुम्हारा ये जिया।

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