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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 97,नवम्बर(द्वितीय), 2020

विजय पर्व

मोहिन्द्र कुमार शर्मा

आओ मिलकर विजय-पर्व मनायें, मिलजुलकर नाचे -गायें, बिना सोचे -समझें न किसी का तिरस्कार करें, अधर्म पर धर्म की जय हो , ऐसा मन में विचार करें, आपस का बैर -भाव भूलायें । इस दुनियाँ के भ्रष्टाचारी रावणत्व पर, रामत्व की विजय हो , विजयदशमी में राम फिर से , धराशायी करें रावण को , आओ मिलकर विजय-पर्व मनायें, मिलजुलकर नाचें गायें। इस जग में मानव की , पीड़ाएं - दुख-दरिद्र मिट जाएं, कोई भूखा न रहे, ऐसा मन में विचार करें , आओ मिलकर विजय – पर्व मनायें, मिलजुलकर नाचें -गायें । राजनैतिक द्वेष भाव न पनपे मानव में , रामराज्य की सता धराशायी न हो जग में , धर्मनिरपेक्ष , प्रभुसता सम्पन हो समाज , मिलजुलकर जग में हो विकास सबका , आओ मिलकर विजय -पर्व मनायें, मिलजुलकर नाचें गायें ।


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